महामंडलेश्वर बनने की पूरी प्रक्रिया क्या है, ममता कुलकर्णी कैसे बन गईं ममतानंद गिरी






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किन्नर अखाड़ा 2015 में स्थापित हुआ, और यह मुख्यधारा के अखाड़ों से अलग है। ममता कुलकर्णी का किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर बनना महाकुंभ मेले के इतिहास में एक नई मिसाल है
प्रयागराज में महाकुंभ मेला 2025 के दौरान शुक्रवार, 24 जनवरी, 2025 को पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को के साथमहामंडलेश्वर के रूप में नियुक्त करतीं किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी
फिल्मी दुनिया से अध्यात्म की दुनिया में कदम रखीं बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने प्रयागराज महाकुंभ मेले में पहुंचकर सांसारिक मोह-माया का त्याग कर दिया। उन्होंने शुक्रवार को किन्नर अखाड़े में संन्यास ग्रहण कर लिया और संत बन गईं। किन्नर अखाड़े ने उन्हें महामंडलेश्वर की पदवी दे दी। आमतौर पर महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया अखाड़ों में कठिन मानी जाती है। व्यक्ति को पहले दीक्षा लेनी होती है और कठोर तपस्या के बाद यह पद मिलता है, लेकिन किन्नर अखाड़ा, जो सनातन धर्म के 13 प्रमुख अखाड़ों से अलग है, अपने अलग नियमों के लिए जाना जाता है। यहां संन्यास लेने और पदवी पाने की प्रक्रिया थोड़ी सरल है। इस घटना ने महाकुंभ में मौजूद श्रद्धालुओं के साथ पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यही वजह है कि भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का केंद्र महाकुंभ मेला इस बार एक अलग ही कारण से चर्चा में है।
ममता कैसे बनीं महामंडलेश्वर?
किन्नर अखाड़े की ओर से महामंडलेश्वर की पदवी देने की घोषणा होने के बाद ममता कुलकर्णी ने गंगा-यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी संगम में स्नान कर अपना पिंडदान किया। इसके बाद उन्होंने भगवा वस्त्र धारण किए और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच उनको दूध से स्नान कराया गया। इस दौरान उनकी आंखों में आंसू थे, मानो अपने पुराने जीवन को हमेशा के लिए विदा कर रही हों। अब ममता कुलकर्णी का नया नाम ‘श्री यमाई ममतानंद गिरि’ है। किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने ममता को यह पदवी दी। कहा जाता है कि किन्नर अखाड़ा उन लोगों को स्वीकार करता है, जो भौतिक जीवन और अध्यात्म के बीच संतुलन बनाकर चलना चाहते हैं।
फिल्मी दुनिया से अध्यात्म की दुनिया में कदम रखीं बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने प्रयागराज महाकुंभ मेले में पहुंचकर सांसारिक मोह-माया का त्याग कर दिया। उन्होंने शुक्रवार को किन्नर अखाड़े में संन्यास ग्रहण कर लिया और संत बन गईं। किन्नर अखाड़े ने उन्हें महामंडलेश्वर की पदवी दे दी। आमतौर पर महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया अखाड़ों में कठिन मानी जाती है। व्यक्ति को पहले दीक्षा लेनी होती है और कठोर तपस्या के बाद यह पद मिलता है, लेकिन किन्नर अखाड़ा, जो सनातन धर्म के 13 प्रमुख अखाड़ों से अलग है, अपने अलग नियमों के लिए जाना जाता है। यहां संन्यास लेने और पदवी पाने की प्रक्रिया थोड़ी सरल है। इस घटना ने महाकुंभ में मौजूद श्रद्धालुओं के साथ पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यही वजह है कि भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का केंद्र महाकुंभ मेला इस बार एक अलग ही कारण से चर्चा में है।
खुद का पिंडदान कर सांसारिक जीवन त्याग किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनीं एक्ट्रेस
किन्नर अखाड़ा 2015 में स्थापित हुआ था और यह मुख्यधारा के 13 प्रमुख अखाड़ों से अलग पहचान रखता है। यह अखाड़ा अपनी खासियत के लिए जाना जाता है, क्योंकि यहां भौतिक जीवन और आध्यात्मिक जीवन को एक साथ जीने की अनुमति है। इसका मुख्य आश्रम उज्जैन में है। इस अखाड़े का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, गोरक्षा, कन्या भ्रूण हत्या का विरोध, और बाल विवाह रोकने जैसे सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देना है। किन्नर अखाड़ा अपने नियमों और परंपराओं में लचीलापन रखता है, जिससे यह अखाड़ा उन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता है, जो पारंपरिक अखाड़ों की कठोर साधना और तपस्या का पालन नहीं कर सकते।
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